छत्तीसगढ़ राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ

 

डाॅ. घनष्याम नागे

अतिथि व्याख्याता (भूगोल), पं. जे.एल.एन. शासकीय कला एवं विज्ञान,

स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बेमेतरा (..)

*Corresponding Author E-mail:

 

ABSTRACT:

मानव जीवन में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं केा महत्वपूर्ण स्थान है। नगरीय परिक्षेत्रों में स्वास्थ्य-सुविधाओं में वृद्धि से लोगों की आयु में वृद्धि हुई है, लेकिन ग्रामीण परिक्षेत्रों में आज भी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सम्बंधी अनेक प्रकार की समस्याएँ विद्यमान ळें अध्ययन क्षेत्र में चिकित्सक-जनसंख्या, चिकित्सक नर्स, रोगी शैय्या जनसंख्या-चिकित्सालय-अनुपात अत्यंत कम है। क्षेत्र में उपलब्ध स्वास्थ्य केन्द्रों में आधारभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई शासकीय एवं गैर सरकारी संगठनों द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं की संख्या में वृद्धि कर आपेक्षित लाभ को प्राप्त किया जा सकता है।

 

KEYWORDS:  स्वास्थ्य, चिकित्सक, सेवाएँ, अनुपात, आयुष, उपलब्ध्ता, अध्ययन क्षेत्र।

 

 


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मानव जीवन में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण स्थान है। किसी भी राष्ट्र की प्रगति के लिए वहाँ के मानव समाज का पूर्णतः स्वस्थ होना अत्यंत आवष्यक है। मानव जीवन की गुणवत्ता के निर्धारण में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं को एक महत्वपूर्ण चर के रूप में सम्मिलित किया जाता है।

 

स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोगिता स्तर को प्रभावित करने वाले विभिन्न क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता के क्षेत्रीय असंतुलन है (बोस और बसु, 2009) स्वास्थ्य सेवाओं में सामुदायिक भागीदारी स्वास्थ्य, सेवा वितरण के लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के सर्वोत्तम तरीकों में एक है (जेमानी और गांगुली, 1993) स्वास्थ्य मुख्य रूप से चिकित्सकों, सामाजिक सेवाओं और अस्पतालों का मुद्दा नहंी है, यह सामाजिक न्याय का मुद्दा है। मानव पारिस्थितिकी तंत्र में प्रभावित पर्यावरण के अतिरिक्त मानव निर्मित सांस्कृतिक पर्यावरण के सभी आयाम शामिल है। (पार्क 2007)

 

स्वतंत्रता के पष्चात भारत सरकार ने पूरी गंभीरता के साथ स्वास्थ्य को सामाजिक-आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण तत्व के रूप में स्वीकार किया है। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने हेतु सरकार ने जनकल्याण स्वास्थ्य नीति की घोषणा की है लेकिन जनसंख्या में निरन्तर वृद्धि के कारण आपेक्षिक परिणाम प्राप्त नहीं हो पा रहे हंै क्योंकि आज भी देष में षिषु एवं मातृ मृत्यु दर अधिक है। नगरीय परिक्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि से लोगों की औसत आयु में वृद्धि हुई है, लेकिन ग्रामीण परिक्षेत्रों में आज भी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी अनेक प्रकार की समस्याएँ विद्यमान है।

 

सरकार ने विकासखण्ड स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं तहसील स्वर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना की है, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य के अधिकांष जिलों में आज भी स्वास्थ्य केन्द्रों की कमी स्वास्थ्य सम्बन्धी अनेक प्रकार की मौलिक सुविधाओं का पूर्णतः अभाव है। जिनका अध्ययन नितांत आवष्यक है।

 

अध्ययन का उद्देष्य

प्रस्तुत अध्ययन के उद्देष्य निम्नांकित हैं।

(1)    अध्ययन क्षेत्र में जनसंख्या - चिकित्सालय-अनुपात को ज्ञात करना।

(2)    अध्ययन क्षेत्र में जनसंख्या-चिकित्सक-अनुपात, जनसंख्या-रोगी शैय्या तथा जनसंख्या-नर्स-अनुपात का पता लगाना।

(3)    अध्ययन क्षेत्र में स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या का अन्य राज्यों के साथ तुलनात्मक अध्ययन करना।

(4)    स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से संबंधित समस्याओं का पता लगाना।

(5)    स्वास्थ्य सेवाओं में होने वाले वृद्धि दर का पता लगाना।

 

विधितंत्र

प्रस्तुत अध्ययन द्वितीयक आँकड़ों के विष्लेषण पर आधारित है। स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आँकड़ों का संकलन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकीय पुस्तिका (2019-20) से प्राप्त कर आँकड़ों का विष्लेषण कर अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं पर केन्द्रित है।

 

अध्ययन क्षेत्र

प्रस्तुत शोध अध्ययन का क्षेत्र छत्तीसगढ़ राज्य है। छत्तीसगढ़ राज्य भारत के हृदय क्षेत्र मध्यप्रदेष के दक्षिण-पूर्व में 17046’ उत्तरी अक्षांश से 2408’ उत्तरी अक्षांष तथा 80015’ पूर्वी देषांतर से 84024’ पूर्वी देषांतर के मध्य अवस्थित है। यह भारत के क्षेत्रफल का 4.11 प्रतिषत भाग में विस्तृत है। राज्य का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 1,35,192 वर्ग किलोमीटर है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ की कुल जनसंख्या 2,55,45,198 है, इनमें 1,96,07,961 ग्रामीण 5,93,7,237 नगरीय जनसंख्या है। यहां जनसंख्या घनत्व 189 व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटर है। राज्य की जनसंख्या वृद्धि दर 22.61 प्रतिषत है। राज्य में अनुसूचित जाति जनसंख्या 32,74,269 जनजाति जनसंख्या 78,22,902 है। वर्तमान में यहां 27 जिले हैं जिनमें 13 पूर्णतया आदिवासी क्षेत्र एवं 5 आंषिक आदिवासी जिले 9 सामान्य (मैदानी क्षेत्र) जिले हैं। आदिवासी विकासखण्डों की संख्या 85 है।

 

राज्य में उपलब्ध स्वास्थ्य संस्थाएँ एवं कार्यरत व्यक्तियों की संख्याः

छत्तीसगढ़ राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के रूप में 5,569 उपस्वास्थ्य केन्द्र, 837 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र 174 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र है। अध्ययन क्षेत्र में 20 उपकेन्द्र (अस्पताल) एवं 26 जिला अस्पताल हैं। अध्ययन क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में चिकित्सकों की संख्या 670 है। आयुर्वेदिक (आयुष) चिकित्सकों की संख्या 534 है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आयुष विषेषज्ञों की संख्या 80 है। शल्य चिकित्सकों की संख्या 28, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विषेषज्ञों की संख्या 30, बाल रोग विषेषज्ञों की संख्या 23 एवं एनेस्थेटिस्ट की संख्या 14, नेत्र रोग विषेषज्ञों की संख्या 22 है। क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में सामान्य ड्यूटी चिकित्सा अधिकारियों (आयुष) की संख्या 95 तथा सामान्य ड्यूटी चिकित्सा अधिकारियों (ऐलोपैथिक) की संख्या 569 है। जनजातीय क्षेत्रों में सामान्य ड्यूटी चिकित्सा अधिकारियों की संख्या 292 है। इन क्षेत्रों के सामदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में रेडियोग्राफरों की संख्या 237 है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में फार्मासिस्टों की संख्या 998 तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में इनकी संख्या 410 है।

 

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रयोगषाला तकनीषियनों की संख्या 807 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में इनकी संख्या 480 हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में स्टाफ नर्स की संख्या 1929 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में इनकी संख्या 2469 है। अध्ययन क्षेत्र में पुरूष स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की संख्या 5702 महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (एन.एम.) की संख्या 9999 है। स्वास्थ्य सहायकों की कुल संख्या 319 है। अध्ययन क्षेत्र के जिला अस्पतालों में शैय्याओं की कुल संख्या 4460 उपजिला अस्पतालों में इनकी संख्या 486 है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में रोगी कल्याण समितियों की कुल संख्या 708 है। जिला पैरामेडिकल स्टाफों की कुल संख्या 1619, उप जिला अस्पतालों में इनकी संख्या 227 है। अध्ययन क्षेत्र के जिला अस्पतालों में चिकित्सकों की कुल संख्या 445 उपकेन्द्रों (अस्पताल) में इनकी संख्या 57 है।

 

इस प्रकार अध्ययन क्षेत्र में प्रति 10 हजार जनसंख्या पर कुल चिकित्सकों की संख्या 0.927 है अर्थात क्षेत्र में 10,778जनसंख्या पर 1 चिकित्सक है। चिकित्सक-नर्स-अनुपात 1.854 है। यहांँ जनसंख्या-नर्स-अनुपात 1.720 है, अर्थात 5,811 जनसंख्या पर 1 नर्स है। अध्ययन क्षेत्र में सामान्य ड्यूटी चिकित्सा अधिकारियों की संख्या 0.374 है, अर्थात यहांँ 26,721 जनसंख्या पर 1 सामान्य ड्यूटी चिकित्सा अधिकारी उपलब्ध है। शल्य चिकित्सकों की संख्या 0.011 है, यह 9,12,328 जनसंख्या पर 1 है। प्रसूति एवं स्त्री रोग विषेषज्ञ चिकिस्कों की संख्या 0.011, षिषु रोग विषेषज्ञों की संख्या 0.009 एनेस्थेटिस्ट की संख्या 0.005, नेत्र-रोग विषेषज्ञों की संख्या 0.008 है। इस तरह क्षेत्र में क्रमषः 8.51,506 जनसंख्या पर 1 प्रसूति एवं स्त्रीरोग विषेषज्ञ चिकित्सक, 11,10,661 जनसंख्या पर 1 षिषुरोग विषेषज्ञ चिकित्सक, 18,24,657 जनसंख्या पर 1 एनेस्थेटिस्ट चिकित्सक, 11,61,145 जनसंख्या पर 1 नेत्र रोग विषेषज्ञ चिकित्सक, छत्तीसगढ़ राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के चिकित्सालयों में उपलब्ध है।

 

इसी तरह अध्ययन क्षेत्र में अन्य चिकित्साकर्मियों में रेडियोग्राफरों की संख्या 0.092 है, अर्थात 1,07,785 जनसंख्या पर 1 रेडियोग्राफर है। फार्मसिस्टों की संख्या 0.551 है। यह 18,143 जनसंख्या पर 1 है। स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रयोगषाला तकनीषियनों की संख्या 0.504 है, अर्थात क्षेत्र में 19,848 जनसंख्या पर 1 तकनीषियन उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त क्षेत्र में उपलब्ध रोगी शैय्या अनुपात 1.936 है अर्थात यहां 5,165 जनसंख्या पर 1 रोगी शैय्या है। क्षेत्र में पुरूष स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की संख्या 2.232, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की संख्या 3.914 स्वास्थ्य सहायकों की संख्या 0.124 है। अर्थात अध्ययन क्षेत्र में क्रमषः 4,480 जनसंख्या पर 1 पुरूष स्वास्थ्य कार्यकर्ता, 2,555 जनसंख्या पर 1 महिला (एन.एम.), 80,078 जनसंख्या पर 1 स्वास्थ्य सहायक उपलब्ध है।

 

स्रोत - राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकीय (2019-20)

 

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढ़ांचे को तीन स्तरीय प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है। (सारणी-2) इसी मानक को आधार मानकर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध प्रमुख स्वास्थ्य केन्द्रों (सामुदायिक, प्राथमिक उप स्वास्थ्य केन्द्र) की उपलब्धता एवं कमी को ज्ञात किया गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या-चिकित्सालय-अनुपातः

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र:

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे बड़ी स्वास्थ्य इकाई प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हैं, जो किसी निष्चित क्षेत्र में रहने वाले विषेषकर ग्रामीण लोगों को व्यापक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है। छत्तीसगढ़ राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या 0.819 है, अर्थात 30,520 जनसंख्या हेतु 1 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है। राज्य में सबसे अधिक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मुंगेली जिले में (1.239) है। यहाँ 24,196 जनसंख्या हेतु 1 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है। द्वितीय क्रम में नारायणपुर जिले का स्थान आता है। यहाँ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या 1.144 है, अर्थात 17,477 जनसंख्या हेतु 1 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है। तृतीय क्रम में बस्तर चतुर्थ क्रम में सुकमा जिले का स्थान आता है। यहाँ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या क्रमषः 0.982 0.959 है।

 

मानक के आधार पर राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की सर्वाधिक कमी बेमेतरा कोण्डागाँव में जिले हैं। इन दोनों जिलों में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की कुल संख्या क्रमषः  0.075 0.072 है। अतः अध्ययन क्षेत्र के बेमेतरा कोण्डागाँव जिले में क्रमषः 39,788 27,563 जनसंख्या पर 1-1 स्वास्थ्य केन्द्र है, अर्थात इन दोनों जिलों में क्रमषः 0.925 0.928 स्वास्थ्य केन्द्रों की और आवश्यकता है।  अध्ययन क्षेत्र के पूर्णतया आदिवासी क्षेत्रों (जिले) में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या 0.820 है, अर्थात यहाँ 24,382 जनसंख्या पर 1 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है। इस प्रकार यहाँ भी 0.219 स्वास्थ्य केन्द्र की और आवश्यकता है। इसी तरह राज्य के आंषिक आदिवासी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की 0.595 है, अर्थात यहाँ 29,521 जनसंख्या पर 1 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है। यहाँ 0.181 स्वास्थ्य केन्द्रों की और कमी है। अध्ययन क्षेत्र के शेष जिले में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या 0.557 से 0.982 है।

 

छत्तीसगढ़ राज्य का अपने पड़ोसी राज्यों के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या का तुलनात्मक अध्ययन करने पर यह स्पष्ट पता चलता है कि छत्तीसगढ़ राज्य की स्थिति बड़ोसी राज्यों से बेहतर है।  छत्तीसगढ़ में जहाँ - 0.181 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की कमी है, वहीं मध्यप्रदेष में -0.492, महाराष्ट्र में - 0.405, तेंलगाना में -0.372, आंध्रप्रदेष में - 0.299 सबसे ज्यादा (-0.734) झारखण्ड राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की कमी है। उड़ीसा छत्तीसगढ़ में स्थिति समान है। यहाँ क्रमषः 0.180 0.181 स्वास्थ्य केन्द्रों की कमी है। भारतीय स्तर पर - 0.364 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की कमी है।

 

 

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रः

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र आमतौर पर बड़े कस्बों में होते है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों द्वारा दी जाने वाली सेवाएँ देने के साथ-साथ यहाँ लोगों के उपचार के लिए बिस्तर सहित विषेष उपकरणों से सज्जित प्रयोगषालाएँ भी होती है। अध्ययन क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या 0.681 है, अर्थात यहाँ 1,46,811 जनसंख्या पर 1 सामुदायिक केन्द्र है। राज्य के बीजापुर जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या सर्वाधिक (1.567) है। द्वितीय क्रम में दंतेवाड़ा जिले का स्थान आता है यहांँ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या 1.128 है। इन दोनों जिले में क्रमषः 51,046 70,870 जनसंख्या पर 1-1 स्वास्थ्य केन्द्र है। तृतीय क्रम में सर्वाधिक स्वास्थ्य कन्द्रों वालें जिले में गरियाबंद का स्थान आता है। यहाँ केन्द्रों की संख्या 1.003 है, अर्थात यहाँ 99,608 जनसंख्या पर एक स्वास्थ्य केन्द्र है। अध्ययन क्षेत्र में सर्वाधिक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की कमी वाले जिलों  में क्रमषः बिलासपुर, कोरबा, मुंगेली बालौदाबाजार प्रमुख है। इन जिलो में क्रमषः - 0.593, - 0.536, - 0.487 - 0.449 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की कमी है। बिलासपुर में 2,45,240 जनसंख्या पर कोरबा में 1,72,377, मुंगेली में 2,33,902 बलौदाबाजार में 2,17,557 जनसंख्या पर 1-1 स्वास्थ्य केन्द्रों की उपलब्धता है। इस प्रकार अध्ययन क्षेत्र (राज्य) में - 0.319 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की कमी है।  अध्ययन क्षेत्र के पूर्णतया आदिवासी क्षेत्रों में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या  0.754 तथा आंषिक आदिवासी क्षेत्रों में 0.595 है, अर्थात यहाँ क्रमषः 1,06,077 1,50,138 जनसंख्या पर 1-1 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र है।

 

पूर्णतया आदिवासी क्षेत्रों -0.246 आंषिक क्षेत्रों में - 0.405 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की कमी है।

 

इस प्रकार छत्तीसगढ़ राज्य में जहाँ 1,46,811 जनसंख्या 1 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र है वहीं राष्ट्रीय स्तर (भारत) में 2,14,348 जनसंख्या पर 1 स्वास्थ्य केन्द्र हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में -0.319 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की कमी है जबकि राष्ट्रीय स्तर -0.534 की कमी है। छत्तीसगढ़ के समीवर्ती राज्यों मंे जिसके अंतर्गत मध्यप्रदेष में 2,20,081 जनसंख्या पर महाराष्ट्र में 2,68,838, आंध्रप्रदेष में 2,49,428, तेंलगाना में 3,70,462, झारखण्ड में 1,86,373 उड़ीसा में 1,09,307 जनसंख्या पर क्रमषः 1-1 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र है। छत्तीसगढ़ की तुलना में तेंलगाना, उत्तरप्रदेष, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेष आदि राज्यों में क्रमषः -0.731, - 0.639, - 0.628 - 0.546 स्वास्थ्य केन्द्रों की कमी है।

 

उप स्वास्थ्य केन्द्रः

यह उपकेन्द्र संगठित स्वास्थ्य सेक्टर की सीमावर्ती चैकी है। यह साधारणतः मैदानी क्षेत्रों में पाँच हजार तथा पहाड़ी पर्वतीय आदिवासी क्षेत्रों में तीन हजार की आबादी पर ग्रामीणों की स्वास्थ्य संबंधी आवष्यकताओं की पूर्ति हेतु स्थापित किया जाता है। इस केन्द्र में स्वास्थ्य कार्यकर्ता ही मुख्य स्वास्थ्य सलाहकार के रूप में सेवाएँ प्रदान करते हैं। अध्ययन क्षेत्र में उप स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या 0.872 है अर्थात यहाँ 4,587 जनसंख्या हेतु 1 उप स्वास्थ्य केन्द्र है। क्षेत्र में सर्वाधिक उप स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या बीजापुर जिले (1.445) में है। इसके बाद द्वितीय क्रम में गरियाबंद जिले का स्थाना आता है।

 

 

स्रोत- राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकीय, (2019-20)

 

 

यहांँ उप केन्द्रों की संख्या 1.331 है। बीजापुर गरियाबंद जिले में क्रमषः 2,075 3,003 जनसंख्या पर 1-1 उप स्वास्थ्य केन्द्र है। अर्थात मानक के आधार पर यहाँ क्रमषः $0.445 $0.331 उप स्वास्थ्य केन्द्र अधिक है। तृतीय क्रम में नारायणपुर चतुर्थ क्रम में सुकमा जिले का स्थान आता है। यहाँ उप स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या क्रमषः 1.244 1.031 है।

 

अध्ययन क्षेत्र (राज्य) में सर्वाधिक उप स्वास्थ्य केन्द्रों की कमी वाले क्षेत्रों में दुर्ग जिले का स्थान सबसे ऊपर है। यहाँ उप स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या 0.641 है, अर्थात यहाँ 7,791 जनसंख्या पर 1 उप केन्द्र है। इसके बाद द्वितीय क्रम में रायपुर, तृतीय क्रम में बिलासपुर चतुर्थ क्रम में बेमेतरा जिले का स्थान है। यहांँ उपस्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या क्रमषः 0.647, 0.558 0.804 है। रायपुर 7,177, बिलासपुर 7,160, बेमेतरा जिले में 6,219 जनसंख्या हेतु 1-1 उपकेन्द्र है।

 

भारतीय मानक के आधार पर छत्तीसगढ़ राज्य में मात्र -0.128 उप स्वास्थ्य केन्द्रों की कमी है, लेकिन पड़ोसी राज्यों जिनमें मध्यप्रदेष, तेंलगाना, महाराष्ट्र, झारखण्ड उत्तरप्रदेष आदि राज्यों में क्रमषः - 0.437, -0.45, -0.621, -0.534 -0.585 उपस्वास्थ्य केन्द्रों की कमी हैं।

 

राष्ट्रीय स्तर (भारत) पर -0.479 उपस्वास्थ्य कन्द्रों की कमी है। छत्तीसगढ़ राज्य में 4587 जनसंख्या पर 1 उपस्वास्थ्य केन्द्र है, जबकि मध्यप्रदेष, तेंलगाना, झारखण्ड उत्तरप्रदेष राज्य में क्रमषः 7,102, 7,270, 8,572 9,616 जनसंख्या पर 1-1 उपकेन्द्र है।

 

स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धिः

अध्ययन क्षेत्र में वर्ष 2005 से 2015 तक (सारणी क्रं. 7) की स्वास्थ्य सेवाओं में हो रही वृद्धि का विष्लेषण करने से यह स्पष्ट होता है कि सबसे अधिक वृद्धि (403.3 प्रतिषत) स्टाफ नर्स की संख्या में हुई है। द्वितीय क्रम में उपस्वास्थ्य केन्द्र हेतु भवन निर्माण की संख्या में हुई है। यहांँ वृद्धि 185.32 प्रतिषत है। तृतीय क्रम में सबसे अधिक वृद्धि प्रयोगषाला तकनीषियनों की रही है। स्वास्थ्य केन्द्रों, में प्रयोगषाला तकनीषियनों की संख्या में 133 प्रतिषत की वृद्धि हुई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों हेतु भवन निर्माण में 107.6 प्रतिषत की, फार्मासिस्टों की संख्या में 102.56 प्रतिषत की वृद्धि हुई है। सभी स्वास्थ्य केन्द्रों के भवनों की कुल संख्या में 163 प्रतिषत की वृद्धि हुई है।

 

अध्ययन क्षेत्र में कुल चिकित्सकों की संख्या में वृद्धि दर नकारात्मक (-30.34 प्रतिषत) रही ंहै। (सारणी क्रं. 7) क्षेत्र में उपस्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या में 36.30 प्रतिषत, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या में 53.1 प्रतिषत तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या में 46.5 प्रतिषत की वृद्धि हुई है। समस्त स्वास्थ्य केन्द्रों की कुल संख्या 38.5 प्रतिषत की वृद्धि हुई है। इस प्रकार अध्ययन क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की संख्या 5.53 प्रतिषत प्रतिवर्ष की दर से वृद्धि हो रही है।

 

स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित समस्याएँः

अध्ययन क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत मूलभूत साधनों सुविधाओं की कमी के परिणामस्वरूप अनेक समस्याएँ विद्यमान है। क्षेत्र के 81.01 प्रतिषत स्वास्थ्य केन्द्र स्वयं के भवन में संचालित हैं। 9.29 प्रतिषत स्वास्थ्य केन्द्र ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध किराये के भवन में तथा 9.69 प्रतिषत स्वास्थ्य केन्द्र सामुदायिक ग्राम पंचायतों के भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहाँ पर्याप्त बिजली पानी आदि की कमी है।

 

अध्ययन क्षेत्र में 79.94 प्रतिषत उपस्वास्थ्य केन्द्र स्वयं के भवन में, 11 प्रतिषत स्वास्थ्य केन्द्र किराये के भवन में 9.06 प्रतिषत किराया मुक्त, ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध सार्वजनिक भवनों जिसके अंतर्गत सामुदायिक, सांस्कृतिक ग्राम पंचायतों के भवन में संचालित हैं।

 

इसी तरह 14.53 प्रतिषत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र यत्र-तत्र संचालित हो रहे है। उपस्वास्थ्य प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की तुलना में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थिति अपेक्षाकृत ठीक है। 94.11 प्रतिषत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों का अपना स्वयं का भवन है, मात्र 5.89 प्रतिषत केन्द्र किराये मुक्त भवनों में संचालित है। अध्ययन क्षेत्र के 11.40 प्रतिषत उपस्वास्थ्य केन्द्र नियमित जल आपूर्ति बिना तथा 13.6 प्रतिषत केन्द्र बिजली की आपूर्ति के बिना संचालित हो रहे हैं। मात्र 43.75 प्रतिषत उपस्वास्थ्य केन्द्रों मेें पुरूष महिला रोगियों के लिए अलग-अलग शौचालय की सुविधा है। अध्ययन क्षेत्र के 11 प्रतिषत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में अलग से प्रसव कक्ष की सुविधा ही नहीं है। क्षेत्र के मात्र 14 प्रतिषत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आपरेषन की सुविधा है। अध्ययन क्षेत्र में 15.1 प्रतिषत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ऐसे हैं जहाँ कम से कम 4 आंतरिक रोगियों के लिए शैय्याएँ उपलब्ध नहीं है। 3.4 प्रतिषत स्वास्थ्य केन्द्र बिजली की नियमित आपूर्ति बिना 1.3 प्रतिषत केन्द्र नियमित जल आपूर्ति बिना संचालित है। 3.8 प्रतिषत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ऐसे हैं जहाँ अभी भी टेलीफोन सुविधा से वंचित है। क्षेत्र के 11 प्रतिषत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में मरीजों के लिए आपातकालीन परिवहन सुविधा (रेफरल परिवहन प्रणाली) एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है। 10.61 प्रतिषत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में अभी भी पंजीकृत रोगी कल्याण समिति इकाई गठित नहीं हुई है जिससे इन केन्द्रों का सुचारू रूप से संचालन में कठिनाईयाँ है। 95.89 प्रतिषत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में विषेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। मात्र 4.11 प्रतिषत केन्द्रों में विषेषज्ञ चिकित्सक है। 5.3 प्रतिषत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बिना प्रयोगषाला के संचालित है। 27.65 प्रतिषत स्वास्थ्य केन्द्र में आपरेषन आदि की सुविधा नही है।

 

6.48 प्रतिषत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में नवजात के लिए कार्यषील स्थिरीकरण इकाई की कमी बनी हुई है। अध्ययन क्षेत्र के 16.47 प्रतिषत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ऐसे हैं जो 30 से कम शैय्या के साथ संचालित है। 18.83 प्रतिषत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में एक्स-रे मषीन आदि की तथा 6.48 प्रतिषत केन्द्रों में एम्बुलेंस की सुविधाएँ नहीं है। 5.31 प्रतिषत केन्द्रों में रोगी कल्याण समिति गठित नहीं है। 4.71 प्रतिषत स्वास्थ्य केन्द्रों में अभी भी नियमित ऐलोपैथिक दवाएँ वितरित नहीं की जाती है। 7.65 प्रतिषत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में संयुक्त शौचालय हैं, जिसका उपयोग महिलाओं एवं पुरूषों के द्वारा किया जाता है, जो निम्न स्वास्थ्य सेवा स्तर को प्रदर्षित करता है।

 

निष्कर्षः

अध्ययन क्षेत्र में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर अत्यंत निम्न बना हुआ है। क्षेत्र में जनसंख्या-चिकित्सा-अनुपात, चिकित्सक-नर्स-अनुपात, जनसंख्या-चिकित्सालय अनुपात, रोगी-षैय्या-अनुपात स्वास्थ्य केन्द्रों में नियमित बिजली, पानी की आपूर्ति की कमी, वातानुकूलित भवनों की कमी, स्वास्थ्य उपचार हेतु उपयोगी मशीनों दवाओं की उपलब्धता की कमी आदि अनेक मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है।

 

सुझाव एवं नियोजन:-

ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या की दृष्टि से स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता का होना अति आवश्यक है, तभी इन क्षेत्रों में राष्ट्रीय मानक के अनुरूप स्वास्थ्य सम्बंधी कार्यक्रमों का संचालन किया जा सकता है। न्यूनतम सुविधा की दृष्टि से जिले के प्रत्येक विकासखण्ड एवं तहसील स्तर में प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की अतिरिक्त आवश्यकता है। प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर उपस्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना की आवष्यकता है। साथ ही साथ ग्राम पंचायत स्तर पर भी चिकित्सक-नर्स-कम्पाउण्डर दवाईयों की नियमित एवं पर्याप्त उपलब्धता जरूरी है।

 

स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने हेतु अध्ययन क्षेत्र में चिकित्सक, नर्स, कम्पाउण्डर विषेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या मंे वृद्धि, स्वास्थ्य उपचार हेतु जरूरी मषीनों की उपलब्धता में वृद्धि, प्रयोगषालामें सहायक सामाग्रियों में वृद्धि इसके अतिरिक्त आधारभूत संरचनाओं में वृद्धि किये जाने की अत्यंत आवष्यकता है।

 

अध्ययन क्षेत्र में विकासखण्ड या तहसील स्तर पर गंभीर बीमारियों के त्वरित उपचार हेतु एक आधुनिक विषेष सुविधाओं से युक्त चिकित्सालय की स्थापना किये जाने की आवश्यकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के स्वास्थ्य स्तर को उन्नत बनाया जा सके। साथ ही साथ राष्ट्रीय राज्य स्तरीय स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रमों का उचित क्रियान्वयन, क्षेत्रीय आवष्यकताओं के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्ति, स्वास्थ्य केन्द्रों की संगठनात्मक एवं वित्तीय व्यवस्था के मध्य समन्वय स्थापित करना, पूर्व स्थापित स्वास्थ्य इकाईयों के कार्य पद्धितियों में गुणात्मक सुधार की अत्यंत आवश्यकता है।

 

संदर्भ ग्रंथ सूचीः

1.     दीक्षित, अरूण, कौषाम्बी जनपद (.प्र.) में स्वास्थ्य सुविधाओें का स्थानिक प्रतिरूप, श्रवनतदंस िप्दजमहतंजमक क्मअमसवचउमदज ।दक त्मेमंतबी टवसण् 3 क्मबण् 2013 . 63.68ण्

2.     नारायण, सुधा: जन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, रिसर्च पब्लिकेषन्स, नई दिल्ली, 1998, पृष्ठ 7, 9.

3.     पाठक, आषुतोष, चिकित्सा सुविधा एवं स्वास्थ्य सेवा नियोजन: विकासखण्ड नगरा, जनपद बलिया (.प्र.) का एक प्रतीक अध्ययन, श्रवनतदंस ि प्दजमहतंजमक क्मअमसवचउमदज ंदक त्मेमंतबी टवसण्3 छवण् 2 क्मबण् 2013 च् 92.93ण्

4.     प्रताप, विरेन्द्र एवं जगदीष सिंह, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा सुविधाओं का स्थानिक संगठन: जनपद चन्दौली, उत्तर भारत भौगोलिक पत्रिका मार्च 2011, अंक-41, संख्या 1 पृष्ठ 27-34

5.       सिंघई, जी.सी., चिकित्सा भूगोल, वसुन्धरा प्रकाषन, गोरखपुर, 2010, पेज 405, 417.

6.     Kumari Krishna and Ravindra Reddy, Naga veni, A study of Health care delivery system in Kurnool District, Andhrapradesh, The deccan Geographer vol. 44, No.2, December 2006, p, 14.

7.     Thakur, Ajay Kumar and V.K. Kumra, Status and Prospect of Health care facilities in Patna city: A critical analysis, national geographical journal of India. Vol. 59, pt. 1, March, 2013.

8.     Yadav Karmaveer and Bikramaditya K. Chaoudhary, Availability of Health Care facilities in mau District, National Geographical Journal of India Vol. 58, pt, 4 Dec. 2012, 73-83.

 

 

Received on 31.10.2021            Modified on 18.11.2021

Accepted on 21.12.2021            © A&V Publications All right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2021; 9(4):171-180.